डॉक्टर! मुझे ब्रेन ट्यूमर है, क्या आप ट्यूमर का ऑपरेशन कर सौ प्रतिशत ठीक कर दोगे?

अपनी ब्रेन ट्यूमर ठीक होते ही कोमल अपने मंगेतर का ट्यूमर ठीक कराने पहुंच गई लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में स्थान पा चुके डा. प्रकाश खेतान के पास

सुदिष्ट नारायण ठाकुर: यह कहानी है यूपी के इलाहाबाद की जो अब प्रयागराज बन चुका है। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपनी कारगर सर्जरी से प्रसिद्धि पा चुके न्यूरो सर्जन डा. प्रकाश खेतान के न्यूरो स्पाइनल सेंटर एंड मैटरनिटी क्लिनिक में 17 फरवरी 2017 को एक युवती पहुंची और डा. खेतान से सीधे मुखातिब होते हुए बोली ‘ मुझे ब्रेन ट्यूमर है, क्या आप ऑपरेशन करके सौ प्रतिशत ठीक कर दोगे। युवती के इस प्रश्न पर डा. खेतान चौंके और उन्होंने कहा कि जरूर उनका काम ही यही है कि मरीज को पूरी तरह ठीक करना। लेकिन यह युवती इस बात पर अड़ी थी कि उसे सौ फीसदी ठीक होने की गारंटी चाहिए। इस युवती का नाम कोमल था, जो प्रयागराज के शिवनगर कॉलोनी की रहनेवाली थी। डा. खेतान ने कहा कि तुम जाओ और दो स्टांप लेकर आओ, मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि तुम्हें पूरी तरह ठीक कर दूंगा। डा. खेतान बताते हैं कि उनकी बात से कोमल का आत्मविश्वास बढ़ा। क्योंकि वह अपने ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए देश भर के कई नामी गिरामी चिकित्सकों एवं अस्पतालों का चक्कर लगा आई थी और सभी जगह उसका यही सवाल होता कि उसे सौ फीसदी ठीक होने की गारंटी दी जाय, तब वह ट्यूमर का ऑपरेशन कराएगी। किसी भी चिकित्सक या अस्पताल ने उसे सौ फीसदी ठीक होने की गारंटी नहीं दी। वह पूरी तरह मायूस थी कि उसे डा. खेतान के बारे में पता चला। वह डा. खेतान के के क्लिनिक में पहुंच गई। मामला जोखिम भरा था, लेकिन डा. खेतान जो कि ब्रेन के 296 सिस्ट का ऑपरेशन कर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड में अपनी जगह बना चुके थे ने इस चुनौती को स्वीकार किया। युवती का ऑपरेशन किया गया और उसके ब्रेन का ट्यूमर निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपनी पढ़ाई में लग गई। एक दिन दिल्ली में वह असंतुलित होकर दूसरी मंजिल से गिर गई और उसकी रीढ़ की हड्‌डी टूट गई। इसके चलते उसका पैर कमजोर होने लगा। उसके परिजन उठाकर एक बार डा. खेतान के पास पहुंचे, जहां उन्होंने उसे भर्ती कर ऑपरेशन किया। इसी बीच उसके जीवन में राकेश नाम का एक युवक प्रवेश कर चुका था, जो उसकी बड़ी बहन का रिश्तेदार था। कोमल कहती है कि राकेश ने उसे मानसिक तौर पर बड़ा सहारा दिया, जिससे वह इतने बड़े दुख से उबर सकी, नहीं तोे जिंदगी से निराश हो चुकी थी। लेकिन कहानी में अभी एक और ट्वीस्ट है। कोमल ने जिस युवक को अपना जीवन साथी बनाने का निर्णय लिया था उसे भी ब्रेन ट्यूमर हो गया था। वह पिछले 16 जुलाई 2019 को राकेश को लेकर डा. खेतान के क्लिनिक में पहुंची और वही सवाल दुहराया जो उसने 17 फरवरी 2017 को डा. खेतान के सामने किया था। डा. खेतान मुस्कुराए और कहा कि राकेश भी सौ प्रतिशत ठीक होगा इसकी गारंटी देता हूं। राकेश का ऑपरेशन हुआ और वह ठीक है। डा. खेतान बताते हैं कि कोमल और उसका मंगेतर अब पूरी तरह ठीक हैं और नई जिंदगी का मजा ले सकते हैं। उनके जीवन का अंधेरा छंट चुका है और मुस्कान की नई सुबह उनकी जिंदगी में प्रस्फुटित हो चुकी है।

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