पश्चिम बंगाल के निकाय चुनावों में तृणमूल का जलवा बरकरार, भाजपा नंबर दो व वामपंती तीसरे स्थान पर, कांग्रेस साफ

खबर आपतक डेस्क, कोलकाता: वामपंथियों की भूमि कही जानेवाली पश्चिम बंगाल से उसकी विदाई होने लगी है। स्थानीय निकाय के चुनावों में वामपंथियों को बड़ा झटका लगा है जब भाजपा उन्हें पछाड़ते हुए नंबर दो पर आसीन हो चुकी है। कांग्रेस की भी पश्चिम बंगाल से विदाई होते दिख रही है, जो कभी यहां नंबर एक व दो हुआ करती थी। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नगरपालिका चुनावों में सभी सात नगरपालिकाओं पर कब्जा करने में सफल रही है। जबकि भाजपा ने नंबर दो का स्थान हथिया लिया है। वामपंथी दल तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं। इन चुनावों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या बंगाल वामपंथ को नकारने लगा है। भाजपा का बंगाल में प्रभाव बढ़ा है, जो भविष्य की बड़ी पार्टी हो सकती है।
तृणमूल ने इन सातों में सबसे बडे़ दुर्गापुर नगर निगम और कूपर्स कैंप में विपक्ष को चित्त करते हुए सभी सीटें जीत ली हैं। इन नगरपालिकाओं के लिए 13 अगस्त को मतदान हुआ था। भाजपा को उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में धूपगुड़ी नगरपालिका के 16 में से चार वार्डों में जीत मिली। इसके अलावा पांशकुड़ा व बुनियादपुर में भी वह एक-एक सीट जीतने में कामयाब रही है। माकपा की अगुवाई वाली वाममोर्चा को नैहाटी नगरपालिका में एक सीट मिली। लेकिन कांग्रेस का कहीं खाता भी नहीं खुल सका। सात नगरपालिकाओं की 148 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस को 140 सीटें मिलीं। भाजपा को छह और वाममोर्चा को एक सीट मिली जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा। दुर्गापुर के अलावा कूपर्स कैंप व हल्दिया नगरपालिका में भी विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए धन और बाहुबल का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के आतंक के बावजूद भाजपा दूसरे नंबर पर रही है। विपक्षी दलों ने चुनावी नतीजों को धोखा करार दिया है। कांग्रेस व वाममोर्चा का कहना है कि यह नतीजे जनादेश की सही तस्वीर नहीं पेश करते।

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