बाढ़ का कहर जारी, जिले को सेना के एक और हेलिकॉप्टर की आवश्यकता, सुदूर इलाकों में नहीं पहुंच पा रही राहत सामग्री

खबर आपतक टीम, मोतिहारी: 13 अगस्त से पूर्वी चंपारण में शुरू हुई बाढ़ की विनाशलीला अभी थमने का नाम  नहीं ले रही है। बाढ़ की विभिषिका ने शुक्रवार तक जिले के 27 में से 20 प्रखंडों को अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ का कहर वर्तमान में सुगौली, बंजरिया एवं मोतिहारी सदर एवं नगर परिषद क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। बाढ़ ने अब जिले के नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है जिसमें पीपरा कोठी, चकिया, पकड़ीदयाल, मधुबन, तेतरिता एवं मेहसी प्रखंडों के कई गांव इसकी चपेट में आ गए हैं। इसकी विनाशलीला ने अब तक 30 से ज्यादा लोगों की जान ले चुकी है। बाढ़ को लेकर भले ही सरकारी स्तर पर पर्याप्त राहत एवं बचाव के दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि अभी भी तीन चौथाई आबादी को बाढ़ सहायता नहीं मिल पाई है। जिले के 16 लाख लोग भीषण बाढ़ का शिकार हुए हैं। जिले की 200 से ज्यादा पंचायतें बाढ़ की विनाशलीला का गवाह है।

सेना के एक और हेलिकॉप्टर की है जिले को जरूरत

मोतिहारी में योगदान देने के बाद राज्य के परिवहन आयुक्त सह विशेष जिलाधिकारी अनुपम कुमार जिलाधिकारी रमण कुमार के साथ सुबह मोतिहारी एवं बंजरिया प्रखंड में  आए बाढ़ का मुआयना किया। उन्होंने इस दौरान शहर के छतौनी चौक, ढाका रोड,. अवधेश चौक, कुंआरी देवी चौक, रघुनाथपुर, बरियारपुर एवं पकड़ीदयाल रोड जाकर बाढ़ की मौजूदा हालात का आंकलन किया। विशेष जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर है। उन्होंने मौके पर ही राज्य के मुख्य सचिव को फोन लगाकर स्थिति की जानकारी देते हुए सेना के एक हेलिकॉप्टर की आवश्यकता बतायी ताकि सुगौली, बंजरिया एवं मोतिहारी के सुदूरवर्ती इलाकों में लोगों तक राहत सामग्री पहुंचायी जाय। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से यह व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इसके बाद रधुनाथपुर पुल के पुराने पुल को हटा दिया गया है ताकि यहां पानी का बहाव सुचारू रूप से हो सके और बाढ़ का पानी धनौती नदी में निकल जाए।

विशेष बैठक में भी उठा हेलिकॉप्टर का मुद्दा

जनप्रतिनिधयों के साथ हुई बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह के समक्ष भी सेना के हेलिकॉप्टर की सहायता का मुद्दा उठा ताकि ज्यादा मात्रा में लोगों तक राहत सामग्री पहुंचायी जा सके। इस मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाने की जनप्रतिनिधियों ने आवाज उठायी। इस पर क्या बात हुई यह खबर आपतक को ज्ञात नहीं है। ज्यादा पानी के कारण शहर के कई मुहल्लों में राहत सामग्री नहीं पहुंच पायी है। हालात यह है कि अगरवा मुहल्ले में करीब 200 परिवार बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं और इनके लिए न तो नाव की व्यवस्था है और न ही एनडीआरएफ या सेना की कोई टीम यहां पहुंच पायी है। यहां प्रशासन को दावा विफल होता दिख रहा है, क्योंकि बाढ़ में  फंसे लोगों ने फोन कर बताया कि उनतक कोई सहायता अभी नहीं पहुंच पायी है। ज्यादा पानी होने के कारण वे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्हें इसके लिए नाव की आवश्यकता है। दूसरी ओर बंजरिया एवं मोतिहारी के सुदूर इलाके में एनडीआरएफ की टीम राहत सामग्री लेकर जा रही है, लेकिन दूर-दराज का इलाका होने के कारण वह एक खेप ही लोगों तक पहुंच पा रही है। सेना के जवानों के साथ भी यही मजबूरी दिख रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी दावा पूरी तरह विफल है और सिर्फ सरकार के लिए बाढ़ पर्यटन साबित हो रही है, क्योंकि यह पर्यटन मंत्री का क्षेत्र है।

राजद प्रवक्ता ने सरकारी दावे को बताया झूठा

प्रदेश राजद प्रवक्ता सह हरसिद्धि विधायक राजेंद्र राम ने जनप्रतिनिधियों की बैठक से बाहर आने के बाद सरकार एवं जिला प्रशासन पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि सभी सरकारी दावा हवा हवाई है। जिले के लोग बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं और न तो आवश्यकता के अनुसार सरकारी नाव है और न ही लोगों तक राहत सामग्री पहुंच पा रही है। लाखों लोग अभी भी बाढ़ से घिरे हुए हैं, जिसके लिए सेना की मदद की जरूरत है और सैन्य हेलिकॉप्टर भी चाहिए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार है इसके बावजूद बाढ़ पीड़ित मदद के लिए चिल्ला रहे हैं और उनकी सुननेवाला कोई नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि लोग भूख, प्यास, दवा के अभाव में मर रहे हैं। बच्चों की स्थिति गंभीर है। लोग घरों  से बाहर निकलना चाहते हैं लेकिन न तो नाव है और न ही उन्हें निकालने के लिए हेलिकॉप्टर। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की बैठक को मजाक बताया और कहा कि इससे प्रशासन के समय का नुकसान हुआ है और राहत एवं बचाव कार्य में बाधा आई है। क्योंकि केंद्रीय मंत्री ने सरकार की ओर से किसी प्रकार की विशेष सहायता की बात नहीं कही। जबकि उनका संसदीय क्षेत्र भी बाढ़ से घिरा हुआ है।

राजद विधायक डा. शमीम सरकार पर बिफरे

नरकटिया के राजद विधायक डा.शमीम ने कहा कि बाढ़ राहत मजाक बनकर रह गया है। पूरा बंजरिया प्रखंड जलमग्न है और हजारों लोग भूख प्यास से बेचैन है और बच्चों की स्थिति मरनासन्न हो चुकी है। दूर-दूर तक कोई सरकारी मदद नहीं दिख रही है। जिले को वायु सेना के एक और हेलिकॉप्टर की जरूरत है, लेकिन इस पर कोई ध्यान देनेवाला नहीं है। लोग सिर्फ फोटो खिंचवाने में लगे हैं पीड़ितों की पीड़ा सुननेवाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि बाढ़ में लोग भूख प्यास से बेचैन होकर निकल रहे हैं और गहरे पानी में डूबने से उनकी मौत हो जा रही है क्योंकि नाव की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सरकारी दावे को मजाक बताया। विधायक ने कहा कि केंद्रीय मंत्री में यह क्षमता नहीं है कि  अपने जिले के लिए केंद्र सरकार से एक और वायु सेना का हेलिकॉप्टर मांग सकें। क्योंकि जिस प्रकार स्थिति भयावह है और मंत्री जिले में हैं अब तक बाढ़ पीड़ितों के बीच एयर ड्रापिंग का कार्य आरंभ हो जाना चाहिए था।

चिरैया के गोढ़ियां के पास बूढ़ी गंडक नदी के बांध में रिसाव

शुक्रवार की देर शाम चिरैया के गोढ़ियां हराज के पास बूढ़ी गंडक नदी के बांध के टूटने की अफवाह तेजी से फैली। पता करने पर सूचना मिली कि बांध में रिसाव हो रहा है, जिसे ठीक करने के लिए सिकरहना  तटबंध के अभियंताओं को लगाया गया था, लेकिन मजदूर रिसाव देख भाग खड़े हुए और अधिकारियों ने हाथ खड़ा कर दिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने कमान संभालते हुए रिसाव को बंद करने में पूरी ताकत झोंक दी है। बताया गया है कि जलसंसाधन विभाग का ठेकेदार जिन मजदूरों को रिसाव देखने एवं बंद करने के काम पर लगाया था वे भाग गए थे और वहां कोई नहीं था। हालात यह था कि सिकरहना एसडीओ भी वहां पहुंचे और वे चिंतित थे, लेकिन ग्रामीणों ने त्वरित कमान संभाली और रिसाव स्थल को ठीक किया। चकिया में भी बांध में रिसाव होने की सूचना है।

मेहसी प्रखंड के कई गांवों में  फैला बाढ़ का पानी

उफनाई बूढ़ी गंडक नदी ने मेहसी प्रखंड के कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। बताया गया है कि बाढ़ का पानी इब्राहिमपुर, दामोदरपुर, कटहां, रंगरेज छपरा, मैन मेहसी सहित अन्य कई गांवों में फैल गया है। वहीं चकिया प्रखंड के अहिरौलिया के पास तटबंध पर दबाव बना हुआ है। पकड़ीदयाल से लेकर मधुबन तक बाढ़ की स्थिति भयावह नजर आ रही है।

पूर्व सांसद को नहीं मिल पाया नाव

पूर्व सांसद साबिर अली बंजरिया प्रखंड के तिरुआह इलाके का भ्रमण करना चाहते थे, लेकिन उन्हें नाव की सुविधा नहीं मिल पाई। बताया गया है कि सभी नाव को राहत एवं बचाव कार्य में लगा दिया गया है। उन्हें भी लोगों ने पीड़ितों की सहायता के लिए एक और हेलिकॉप्टर के लिए केंद्रीय नेताओं से बात करने को कहा गया।

 

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