लोहिया, जयप्रकाश व जार्ज के बहाने माइनॉरिटी वोटों पर नीतीश की नजर

खबर आपतक, पटना: सूबे के सीएम नीतीश कुमार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर अपनी अलग राय रखते हैं और उन्होंने इस पर अपने पार्टी नेताओं के माध्यम से खुलकर विरोध जताया है। जदयू नेताओं का कहना है कि धारा 370 को हटाना एनडीए का नहीं, बल्कि भाजपा का एजेंडा था। उनकी पार्टी शुरू से कश्मीर से धारा 370 को हटाने का विरोधी रही है, क्योंकि उनकी पार्टी समाजवादी आंदोलन की उपज है। समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण व जार्ज फर्नांडिस कभी नहीं चाहते थे कि कश्मीर से धारा 370 हटायी जाए। यह एक विवादित मुद्दा था और इसको लेकर भाजपा को सभी सहयोगी दलों के साथ बैठक कर राय लेनी चाहिए थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसलिए उनकी पार्टी कश्मीर को लेकर राज्यसभा व लोकसभा में लाई गई विधेयक का समर्थन नहीं करती है। उनकी पार्टी इस मामले में वोटिंग का बहिष्कार करेगी। जदयू के इस स्टैंड पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश चाहते हैं कि माइनॉरिटी वोट उनकी ओर आए, लेकिन भाजपा के साथ रहते संभव नहीं है। नीतीश वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के समय भी एनडीए को छोड़कर अकेले लोकसभा चुनाव लड़े थे और पार्टी मात्र दो सीटें जीत पाई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी 16 सीटें मोदी लहर में निकाल ली। अगले साल बिहार में विधानसभा का चुनाव होना है, यहां कई सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक हैं। यहां बता दें कि नीतीश कुमार की पार्टी ने तीन तलाक बिल का भी विरोध किया था, औऱ वोटिंग के समय सदन से वाक आउट किया था। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह कैसा विरोध है कि वोटिंग में भाग ही नहीं लिया जाय। नीतीश कुमार जिन वोटरों को अपनी ओर करने के लिए भाजपा से इतर अपनी राह तलाश रहे हैं, वह पूरा नहीं होनेवाला है। क्योंकि उनकी धुर विरोधी राजद उन वोटरों पर अपना प्रभाव रखती है। अगर नीतीश को अल्पसंख्यकों के मतों को लेना है तो उन्हें एक बार फिर राजद एवं लालू की शरण में जाना पड़ेगा।

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