वोट की चोट: कश्मीर में धारा 370 हटाने को पड़े 370 वोट, लोकसभा से विधेयक हुआ पारित

खबर आपतक, नई दिल्ली: मंगलवार को लोकसभा में एक और इतिहास बना, जब धारा 370 की विदाई के लिए 370 सांसदों का वोट मिला। विरोध मेंं सिर्फ 70 वोट पड़े और बाकी सांसदों ने वाकआउट किया। इस प्रकार लोकसभा में इस बिल को पांच गुना ज्यादा मत मिले, जो किसी ऐसे बिल जिस पर अधिकाश पार्टियां अपनी अलग राय रखती थी के उलट हुआ। बिल को पेश करने के बाद इस पर जमकर बहस हुई और कई बार गृहमंत्री शाह को बीच में उठकर विपक्षी सांसदों का जबाब देते देखा गया। शाह ने कहा कि फौरी तौर पर कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। स्थिति अनुकूल होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा भी दिया जाएगा। इस दौरान गृहमंत्री ने पाक अधिकृत कश्मीर पर भी अपना दावा जताया और कहा कि उसे प्राप्त करने के लिए वे अपनी जान तक दे सकते हैं। अमित शाह ने विरोधी पार्टियों के सवालों का पूरे तेवर के साथ जबाब दिया। वे इसके लिए पूरा होमवर्क करके आए थे। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित होते हुए भी वहां दिल्ली की तर्ज पर मुख्यमंत्री एवं उनका मंत्रीमंडल भी होगा। इस दौरान भाजपा नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू को कश्मीर समस्या के लिए जिम्मेवार बताया। नेताओं ने कहा कि नेहरू ने सरदार पटेल की अनिच्छा के बावजूद कश्मीर में धारा 370 लागू करायी, जबकि पहली जरूरत पूरे कश्मीर को कब्जे में लेने की थी, जिसमें पीओके भी शामिल था। कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी, मनीष तिवारी और शशि थरूर ने बहस का मोर्चा संभाल रखा था। चौधरी ने कश्मीर मसले को अंतराष्ट्रीय बताया, जिसपर उनकी जमकर किरकिरी हुई। बहस के बाद हुई वोटिंग में एनडीए में शामिल जदयू एवं टीएमसी समाजवादी ने वोटिंग का बहिष्कार किया। जबकि डीएमके, ओवैसी की एआईएमआईएम ,ममता बनर्जी की टीएमसी, कांग्रेस और वामपंथियों पार्टियों ने इसके खिलाफ वोटिंग की। भाजपा को जदयू को छोड़ अपनी सहयोगी पार्टियों के अलावा बहुजन समाज पार्टी, बीजेडी, वाई एस आर कांग्रेस, टीडीपी जैसी पार्टियों का साथ मिला, जिससे वोट के पक्ष में आंकड़ा 370 पर पहुंच गया।

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